पर्यटन का विकास या जोखिम का विस्तार?
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक जीवन में पर्यटन की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विशेषकर सीमांत जनपदों में पर्यटन को रोजगार, स्वरोजगार और पलायन रोकने के प्रभावी साधन के रूप में देखा जा रहा है। इसी सोच के तहत चंपावत जनपद में तल्ला देश ट्रेल, बूम-खलढूंगा-चूका-टाक ट्रेल, पनार वैली ट्रेल, देवीधुरा-धूनाघाट ट्रेल तथा चल्थी-दुर्गापीपल-लधिया वैली ट्रेल सहित विभिन्न कार्बेट ट्रेल विकसित किए गए हैं। यह पहल निस्संदेह स्वागत योग्य है, क्योंकि इससे न केवल स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि जनपद की ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहरों को भी नई पहचान मिलेगी।
किन्तु किसी भी विकास परियोजना की सफलता केवल उसके निर्माण से नहीं, बल्कि उसके सुरक्षित और सतत संचालन से तय होती है। चंपावत स्थित जिम कॉर्बेट हेरिटेज फॉरेस्ट ट्रेल आज इसी कसौटी पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।
प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण यह ट्रेल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित अवश्य करता है, लेकिन इसके अधिकांश हिस्सों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी चिंताजनक है। खड़ी ढलान, रेतीली एवं फिसलन भरी मिट्टी, शिलायुक्त संकरे मार्ग और अनेक स्थानों पर सुरक्षा रेलिंग का अभाव किसी भी समय दुर्घटना को आमंत्रित कर सकता है। ट्रेल के प्रारंभिक हिस्से में सीमित सुरक्षा व्यवस्था दिखाई देती है, किंतु आगे बढ़ते ही पर्यटक स्वयं को प्रकृति और जोखिम, दोनों के भरोसे छोड़ देने को विवश हो जाते हैं।
स्थिति और अधिक गंभीर तब हो जाती है, जब पर्यटक ट्रेल के अंतिम पड़ाव पर पहुंचते हैं। यहां बहती गौड़ी नदी, विशाल शिलाएं और प्राकृतिक जलकुंड आकर्षण का केंद्र हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में फोटो और वीडियो बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति ने जोखिम को और बढ़ा दिया है। फिसलन भरी चट्टानों पर चढ़ना, गहरे जलकुंडों के समीप जाना और बिना किसी निगरानी के साहसिक गतिविधियां करना कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। विडंबना यह है कि पूर्व में इस क्षेत्र में कई लोगों की जान जा चुकी है, इसके बावजूद न तो पर्याप्त चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की गई है।
यह प्रश्न केवल एक ट्रेल तक सीमित नहीं है। यह हमारी विकास संबंधी सोच का भी प्रतिबिंब है। अक्सर देखा गया है कि परियोजनाओं का उद्घाटन और उनका प्रचार-प्रसार तो तेजी से होता है, लेकिन रखरखाव, सुरक्षा और दीर्घकालिक प्रबंधन को अपेक्षित महत्व नहीं दिया जाता। परिणामस्वरूप, जिन परियोजनाओं को विकास का प्रतीक बनना चाहिए, वे कभी-कभी चिंता और जोखिम का कारण बन जाती हैं।
इको टूरिज्म का मूल दर्शन प्रकृति के संरक्षण, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और पर्यटकों की सुरक्षा पर आधारित है। यदि इनमें से किसी एक पक्ष की भी उपेक्षा होती है, तो पूरी अवधारणा कमजोर पड़ जाती है। इसलिए आवश्यक है कि जिम कॉर्बेट हेरिटेज फॉरेस्ट ट्रेल सहित सभी ट्रेल मार्गों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। संवेदनशील स्थलों पर मजबूत रेलिंग, चेतावनी संकेतक, प्रशिक्षित गाइड, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती तथा आपदा प्रबंधन संबंधी तंत्र को तत्काल प्रभाव से विकसित किया जाए।
पर्यटन का उद्देश्य लोगों को प्रकृति से जोड़ना है, उन्हें खतरे के हवाले करना नहीं। विकास तभी सार्थक होगा, जब वह मानव जीवन की सुरक्षा और सम्मान के साथ आगे बढ़े। अन्यथा, पर्यटन को बढ़ावा देने की यह महत्वाकांक्षी पहल अनजाने में त्रासदी का कारण भी बन सकती है।


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